झारखंड के गोड्डा जिले के कई गाँवों में विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश करने के आरोप सामने आए हैं। विशेष अंतरिक्ष पुनरावलोकन (SIR) के दौरान, कुछ बूथों पर फॉर्म‑7 जमा कर मतदाता सूची से नाम हटाने की मांग की गई, जिसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम शामिल होने का दावा किया गया है।

SIR प्रक्रिया और फॉर्म‑7 की भूमिका

SIR (Special Intensive Revision) भारत में मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक विस्तृत प्रक्रिया है। इस क्रम में फॉर्म‑7 वह दस्तावेज़ है जिसके द्वारा कोई भी व्यक्ति अपने या किसी अन्य व्यक्ति के नाम को सूची से हटाने की अपील कर सकता है। आयोग ने चार वैध कारण बताए हैं: व्यक्ति का अस्तित्व न होना, दूसरे स्थान पर स्थानांतरण, मृत्यु या दो स्थानों पर नाम का दोहराव।

गोड्डा में विवादित घटनाएँ

30 जून को शुरू हुई SIR प्रक्रिया के तहत 5 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची जारी की गई, जिसमें लगभग 16.48% यानी 43 लाख नामों को हटाया गया। इस मसौदे के बाद गोड्डा के कुछ गाँवों में एक स्पष्ट पैटर्न उभरा: कई बूथ लेवल एजेंट (BLA) ने फॉर्म‑7 के बंडल लेकर स्थानीय बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास प्रस्तुत किए, जिनमें मुख्यतः अल्पसंख्यक समुदाय के नाम हटाने की मांग थी।

महेशटिकरी में 25 फॉर्म का मामला

गोड्डा के महेशटिकरी गाँव के बूथ नं. 9 पर एक BLA ने 25 फॉर्म‑7 जमा किए। BLO अनीसा बानो ने कहा कि ये फॉर्म झूठे हैं और इनमें अधिकांश नाम मुस्लिम मतदाताओं के थे। प्रारम्भ में फॉर्म स्वीकार किए गए, परंतु ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) श्रीमान मरांडी ने यह निर्देश दिया कि ये आधिकारिक फॉर्म नहीं हैं, इसलिए आगे कोई फॉर्म नहीं लिया गया।

पचुआ किता में 75 फॉर्म

पचुआ किता गाँव के BLO मुख्तार के पास एक और BLA ने 75 फॉर्म‑7 लेकर आया। मुख्तार ने बताया कि ये फॉर्म नाम जोड़ने के नहीं, बल्कि नाम हटाने के थे, और अधिकांश नाम फिर से 2003 की सूची में दर्ज थे। प्रश्न पूछने पर BLA ने सभी फॉर्म जला दिए।

चार बूथों से मिली शिकायतें

गोड्डा के बसंतराय प्रखंड के महेशटिकरी, पचुआ किता, लोचनी और बघाकोल में रहने वाले नागरिकों ने ERO (Electoral Registration Officer) को लिखित शिकायतें दीं। 70‑वर्षीय अब्दुल मन्नान खान, 50‑वर्षीय मोहम्मद नौशाद और 80‑वर्षीय मोहम्मद शफीक जैसे कई परिवारों ने कहा कि उनका नाम 2003 की सूची में था और वे डरते हैं कि अब उन्हें सरकारी योजनाओं से वंचित किया जा सकता है।

BJP का अलग पक्ष

27 अगस्त को BJP के झारखंड SIR संयोजक राकेश प्रसाद ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक ज्ञापन दिया, जिसमें साहिबगंज और गोड्डा में SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत की गई। पार्टी ने कहा कि कई BLO ने BJP के BLA द्वारा प्रस्तुत फॉर्म‑7 को अस्वीकार करके प्रक्रिया में बाधा डाली। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महेशटिकरी की BLO अनीसा बानो ने BLA की जानकारी सार्वजनिक कर उसे दबाव में डाला।

BLA की बयानबाजी

जिन BLA पर फॉर्म‑7 जमा करने के आरोप हैं, उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक अमित कुमार मंडल ने उन्हें लगभग 25 फॉर्म‑7 दिए थे और उन्हें BLO को सौंपने को कहा था। जब उन्हें पता चला कि फॉर्म झूठे हैं, तो उन्होंने सब फॉर्म जला दिए। कई BLA ने यह भी बताया कि उन्होंने फॉर्म को नाम जोड़ने के रूप में समझा था, न कि हटाने के।

प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों का रुख

BDO मरांडी ने कहा कि आपत्ति दर्ज करने वाले व्यक्ति या उसके प्रतिनिधि को ठोस सबूत प्रस्तुत करने चाहिए। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि हर फॉर्म‑7 को स्थल पर जाकर जांचा जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी क. रवि कुमार ने कहा कि अब तक कोई अवैधता सिद्ध नहीं हुई है; फॉर्म‑7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज करना वैध प्रक्रिया है, लेकिन BLO को फॉर्म खारिज नहीं करना चाहिए।

"यदि कोई नाम दो जगह दर्ज है, तो BLA उसे हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कर सकता है, लेकिन इसे सत्यापित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है," — अमित कुमार मंडल (पूर्व विधायक)

निष्कर्ष

गोड्डा में चल रही इस बहस ने SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और सामुदायिक संवेदनशीलता की आवश्यकता को उजागर किया है। जबकि पार्टी और प्रशासन दोनों अपने-अपने पक्ष को दृढ़ता से रख रहे हैं, अंतिम फैसला अब भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी और AERO के हाथ में है। इस दौरान यह देखना रहेगा कि क्या अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम वास्तव में हटाए जाएंगे या यह मामला न्यायिक जाँच के बाद ही स्पष्ट होगा।